मैहर वाली माँ शारदा भवानी

मैहर वाली माँ शारदा भवानी

karunanidhi tripathi

By Karunanidhi

मैहर देवी मंदिर सतना ज़िले के मैहर नगर में स्तिथ है| यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की चोटी पर 600 फीट की उँचाई पर शोभमान है| इस मंदिर तक पहुँचने के लिए 1063 सीढ़ियाँ बनी हुई हैं| इसके इलावा मंदिर तक रोप-वे की सुविधा भी प्रदान की गयी है जिसका थोड़ा सा किराया अदा कर के रोप-वे के द्वारा मंदिर के प्रांगण तक पहुँचा जा सकता है| मंदिर मे रुकने के लिए मनाही है| कहा जाता है की यदि कोई वियक्ति यहाँ रात को रुकने की कोशिश करता है तो वह अगली सुभह नही देख पाता| उसकी मृत्यु हो जाती है| मैहर पहुँचने के लिए सड़क के द्वारा, रेलवे के द्वारा पहुँचा जा सकता है| यहाँ पर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए नहाने और आराम करने के सुविधा दी गयी है| जो लोग स्टेशन पर नही रुकना चाहते उनके लिए स्टेशन के पास ही होटेल और लॉज भी बने हुए हैं| मैहर स्तिथ माता शारदा जी का मंदिर भक्तों के आस्था का केंद्र है| पूरे भारत में माँ शारदा का ये अकेला ही मंदिर है| इस मंदिर के साथ गौरी शंकर जी, श्री हनुमान जी, श्री काल भैरवी जी, श्री काल भैरव जी, ब्रह्मदेव जी और जलपा देवी जी की भी पूजा की जाती है| मदिर से अगर नीचे की देखा जाए तो आल्हा रुदल का अखाड़ा दिखाई देता है जहाँ पर माता के परम भक्त आल्हा जी और रुदल जी कुश्ती किया करते थे|

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Navaratri Pujan Dicision- shri durga puja in navratri

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The Word “Navratri” has two words:“Nav” (Nine) and “Ratri” (Night). “Nav” denotes a number 9 and “Ratri” denotes the nighttime.

“या देवी सर्वभुतेशू | शक्ति-रूपेण संस्थिता ||
नमस-तस्यै नमस-तस्यै | नमस-तस्यै नामो नमह ||”

अर्थ: उस देवी के लिए जो सभी प्राणियों में शक्ति, शक्ति, शक्ति के रूप में रहती है। उसे नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार

Maa sharda maihar devi

पौराणिक कथा

भारत वर्ष में माता दुर्गा देवी जी के 51 शक्तिपीठ बताए गये हैं | पूर्व काल में माता सती जी के पिता और भगवान शंकर जी के ससुर प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यग्य का अनुष्ठान किया| उसमे उन्होने सभी देवताओं को तो बुलाया पर अपने जामाता भगवान शकर जी को निमंत्रण नही दिया| जब सती जो को अपने पिता के इस यग्य का पता लगा तो उन्होने भगवान शंकर जी से यग्य मे शामिल होने की इच्छा बताई[ भगवान ने उन्हें बिना निमंत्रण के जाने से मना कर दिया| पर माता सती जी ज़िद कर के यग्य में शामिल होने चली गयी |  वहाँ पर उनके पिता जी, सती जी का स्वागत करने की जगह उनका बहुत अपमान करने लगे और भगवान शंकर जी के बारे में बुरे शब्द कहने लगे| पिता दक्ष के मुख से अपने पति भगवान शिव शंकर की के लिए अपमान जनक शब्द सुने तो उनको बहुत दुख हुआ|

ये अपमान उनसे सहा नहीं गया और उन्होने यग्य की अग्नि मे अपनी आहुति दे कर अपने शरीर को जला डाला| भगवान शंकर जी को जब इस बात का पता लगा तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होने अपने रुद्र गण वीर-भद्र और भद्र काली को भेज कर दक्ष के यग्य का विध्वंस कर डाला| वीरभद्र ने दक्ष और उनकी पूरी  सेना को मार डाला और जो भी देवता उनको बचाने के लिए आगे आए उन्हे भी नहीं छोड़ा| सब कुछ ख़त्म होने के बाद जब भगवान शंकर जी यग्य के पास आए तो उहोने माता सती जी के जले हुए मृत शरीर को अपनी बाँहों मे उठा लिया और रोते हुए पूरी श्रष्टि में भटकने लगे| भगवान विष्णु जी ने भगवान शंकर जी को इस कष्ट मे देखा तो उन्होने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती जी के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए| यही शरीर के टुकड़े पृथ्वी पर अलग अलग 51 जगह पर गिरे और इन्ही से माता के 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई|कहा जाता है कि मैहर में माता का हार गिरा था. इसी लिए इस जगह का नाम मैहर पड़ा|

5 thoughts on “मैहर वाली माँ शारदा भवानी”

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